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Bahraich News: 8 साल के बच्चे ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए सौंप दी अपनी गुल्लक, जीत लिया सबका दिल

Bahraich News: 8 साल के बच्चे ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए सौंप दी अपनी गुल्लक, जीत लिया सबका दिल

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। महज 8 साल के एक बच्चे ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी सालभर की बचत वाली गुल्लक जिला प्रशासन को सौंप दी।

कक्षा 3 में पढ़ने वाले अल्फाज शेख ने अपनी गुल्लक में जमा पैसे जरूरतमंद लोगों के लिए देने का फैसला किया। वह अपनी गुल्लक लेकर बहराइच के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के पास पहुंचे और इच्छा जताई कि उनकी बचत नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जाए।



मोबाइल पर बाढ़ की तस्वीरें देखकर हुआ दुख

रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे ने नेपाल में आई बाढ़ के वीडियो मोबाइल पर देखे थे। वहां के लोगों की परेशानी देखकर उसने अपने परिवार से मदद करने की इच्छा जताई।

बच्चे के दादा कासिम अली के मुताबिक अल्फाज ने पिछले करीब एक साल में मिली छोटी रकम और सिक्के अपनी गुल्लक में जमा किए थे। परिवार का अनुमान था कि गुल्लक में लगभग ₹2,000 हो सकते हैं।

जिला प्रशासन को सौंपी गुल्लक

बच्चे और उसके परिवार ने नेपाल तक पैसे पहुंचाने के तरीके पर स्थानीय लोगों से चर्चा की। आखिरकार उन्होंने गुल्लक को जिला प्रशासन के माध्यम से भेजने का फैसला किया।

अल्फाज ने अपनी गुल्लक जिलाधिकारी को सौंपते हुए इच्छा जताई कि इसे उसी रूप में नेपाल भेजा जाए, ताकि उसकी बचत सीधे बाढ़ पीड़ितों की मदद में इस्तेमाल हो सके।

प्रशासन तलाश रहा है रास्ता

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों के सामने गुल्लक को नेपाल तक पहुंचाने को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया का सवाल आया। अब अधिकारियों की ओर से नेपाल दूतावास के माध्यम से इसे भेजने की संभावना पर काम किया जा रहा है।

अधिकारियों का प्रयास है कि बच्चे की गुल्लक उसकी इच्छा के मुताबिक नेपाल तक पहुंचाई जाए।

बहराइच का नेपाल से विशेष जुड़ाव

बहराइच नेपाल की सीमा से जुड़ा उत्तर प्रदेश का जिला है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद यहां भी सीमा पार से जुड़ी घटनाओं का असर देखने को मिला।

रिपोर्ट के अनुसार बहराइच में नेपाल की बाढ़ से जुड़े 14 अज्ञात शव भी पहुंचे थे, जिन्हें पोस्टमार्टम और डीएनए नमूने सुरक्षित रखने की प्रक्रिया के बाद नेपाली अधिकारियों को सौंप दिया गया।

ऐसे माहौल में एक छोटे बच्चे की ओर से अपनी बचत मदद के लिए देना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

छोटी उम्र में बड़ी सोच

अल्फाज की पहल यह दिखाती है कि मदद के लिए हमेशा बड़ी रकम जरूरी नहीं होती। अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद के लिए योगदान देना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

बच्चे ने अपनी गुल्लक में जमा पैसे को अपने लिए खर्च करने के बजाय उन लोगों के लिए देने का फैसला किया जिन्हें उसने केवल वीडियो में परेशानी में देखा था।




निष्कर्ष: बहराइच के 8 वर्षीय अल्फाज की पहल ने यह संदेश दिया है कि मानवीय संवेदना उम्र या रकम की मोहताज नहीं होती। अब प्रशासन का प्रयास है कि उसकी गुल्लक सुरक्षित तरीके से नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जाए।

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