UP News: राजस्व मामलों के लिए यूपी में शुरू हुए 3 ऑनलाइन पोर्टल, अब घर बैठे ट्रैक होगी फाइल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राजस्व से जुड़े मामलों को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने तीन ऑनलाइन पोर्टल शुरू किए हैं। इन पोर्टलों की मदद से राजस्व मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग, निचली अदालतों के रिकॉर्ड का डिजिटल ट्रांसफर और जमीन से जुड़े म्यूटेशन मामलों की स्थिति को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
तीन अलग-अलग ऑनलाइन सुविधाएं
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने तीन डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत की। इनमें ई-फाइलिंग पोर्टल, लोअर कोर्ट रिकॉर्ड पोर्टल और धारा 34 म्यूटेशन पोर्टल का ट्रायल वर्जन शामिल है।
ई-फाइलिंग सुविधा के जरिए लोग नए राजस्व मामले ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपने मामले की प्रगति जानने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
कोर्ट रिकॉर्ड भी होगा डिजिटल
दूसरे पोर्टल के माध्यम से निचली राजस्व अदालतों से रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में राजस्व परिषद तक भेजा जा सकेगा।
अभी कई मामलों में फाइलों और दस्तावेजों को भौतिक रूप से एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भेजने में समय लगता है। डिजिटल व्यवस्था से रिकॉर्ड ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज करने और फाइलों के गुम होने की संभावना कम करने का प्रयास किया गया है।
जमीन के म्यूटेशन मामलों पर खास ध्यान
तीसरा पोर्टल धारा 34 के तहत आने वाले म्यूटेशन मामलों की निगरानी के लिए तैयार किया जा रहा है।
राजस्व विभाग के अनुसार म्यूटेशन से जुड़े मामले परिषद के सामने आने वाले मामलों की बड़ी श्रेणी हैं। नए सिस्टम के जरिए आवेदक और अधिकारी यह देख सकेंगे कि कोई मामला कितने समय से लंबित है और किस स्तर पर देरी हो रही है।
पहले चार जिलों में होगा परीक्षण
म्यूटेशन पोर्टल को फिलहाल श्रावस्ती, बांदा, बलरामपुर और हरदोई में परीक्षण के तौर पर लागू किया जाना है। परीक्षण के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन व्यवस्था आने से धारा 34 के म्यूटेशन मामलों से जुड़े कानून या मूल प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया गया है। बदलाव मुख्य रूप से मामलों की निगरानी और ट्रैकिंग को डिजिटल बनाने को लेकर है।
ऑफलाइन व्यवस्था भी जारी रहेगी
डिजिटल सुविधा शुरू होने के बावजूद ऐसे लोगों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था जारी रहेगी जो ऑनलाइन सिस्टम का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं।
लोगों को क्या फायदा होगा?
इसका मतलब है कि नागरिकों को केवल ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि राजस्व मामलों में लोगों को बार-बार संबंधित कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़ें। साथ ही आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखने से प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है।
अगर सिस्टम ठीक तरीके से लागू होता है तो लंबित मामलों की निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और अधिकारियों के स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष: यूपी में राजस्व सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में शुरू किए गए ये तीन पोर्टल जमीन और राजस्व मामलों से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल म्यूटेशन पोर्टल का परीक्षण चार जिलों में किया जाएगा।

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