BREAKING

UP Power Crisis: यूपी में बिजली संकट गहराया, बारिश और कोयले की कमी से रात में कटौती



लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बीच कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। कई तापीय विद्युत परियोजनाओं में कोयले की उपलब्धता कम होने और गीला कोयला मिलने के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय बिजली आपूर्ति पर दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अनुसार दिन के समय स्थिति सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि शाम और रात के पीक आवर्स में कुछ क्षेत्रों में सीमित रोस्टरिंग की जा रही है।

बारिश ने बढ़ाई बिजली संकट की परेशानी

दरअसल, लगातार भारी बारिश के कारण कई कोयला खदानों में पानी भर गया है। इससे कोयले का उत्पादन और खदानों से बिजलीघरों तक उसकी ढुलाई प्रभावित हुई है। इसके अलावा बारिश से कोयला गीला होने के कारण तापीय बिजली संयंत्रों में उसका इस्तेमाल भी प्रभावित हो रहा है।

यूपी में तापीय बिजली उत्पादन राज्य की कुल बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में जब कोयले की उपलब्धता कम होती है तो बिजली उत्पादन पर तत्काल असर पड़ता है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश की कई तापीय इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हुआ है और कुछ इकाइयां तकनीकी कारणों तथा ईंधन की कमी के चलते पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय ज्यादा असर

बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील मुख्यालयों और नगर पंचायत क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। UPPCL के मुताबिक दिन में बिजली आपूर्ति को सामान्य रखने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन शाम और रात के पीक आवर्स में मांग बढ़ने पर उपलब्ध बिजली कम पड़ रही है। ऐसे में कुछ क्षेत्रों में सीमित समय के लिए रात में रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय कई घंटे बिजली कटौती हो रही है। दिन में सौर ऊर्जा से कुछ राहत मिल जाती है, लेकिन रात में सौर उत्पादन उपलब्ध नहीं होने के कारण बिजली की कमी ज्यादा महसूस होती है।

बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर

सितंबर में भी प्रदेश में बिजली की मांग काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इससे उत्पादन में थोड़ी भी कमी आने पर मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट में बताया गया था कि प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 25 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई थी, जबकि बारिश और कोयले की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ।

समस्या इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि पीक आवर्स में पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदना आसान नहीं हो पा रहा है। UPPCL के अनुसार पीक समय में एक्सचेंज के माध्यम से मांगी गई बिजली का बहुत छोटा हिस्सा ही उपलब्ध हो पा रहा है। ऐसे में राज्य को अपनी उपलब्ध उत्पादन क्षमता और मौजूदा संसाधनों के आधार पर बिजली आपूर्ति का प्रबंधन करना पड़ रहा है।

जिला मुख्यालयों पर आपूर्ति जारी रखने की कोशिश

बिजली विभाग का कहना है कि जिला मुख्यालयों पर आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है और वहां निर्बाध बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में पीक डिमांड के दौरान सीमित कटौती की जा रही है।

सरकार और बिजली विभाग की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोल इंडिया तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है, ताकि बिजलीघरों तक कोयले की आपूर्ति बढ़ाई जा सके और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाया जा सके।

जल्द सुधार की उम्मीद

कोयले की आपूर्ति में सुधार के संकेत भी मिलने लगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार बारिश कम होने के बाद नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने उत्पादन और डिस्पैच बढ़ाया है। इससे उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद जगी है।

हालांकि, जब तक तापीय बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला स्टॉक उपलब्ध नहीं हो जाता और बंद या कम क्षमता पर चल रही इकाइयां पूरी क्षमता से काम नहीं करने लगतीं, तब तक पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?

फिलहाल शहरी और जिला मुख्यालय वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को अपेक्षाकृत सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में रात के समय कटौती की संभावना बनी हुई है। इसलिए अगले कुछ दिनों में बारिश, कोयले की उपलब्धता और बिजली उत्पादन की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में बिजली संकट कितना लंबा चलता है।

कुल मिलाकर, यूपी का मौजूदा बिजली संकट मुख्य रूप से भारी बारिश से कोयले के उत्पादन और परिवहन में आई बाधा, गीले कोयले और तापीय इकाइयों के प्रभावित उत्पादन से जुड़ा है। विभाग का दावा है कि स्थिति को संभालने के प्रयास जारी हैं और कोयले की आपूर्ति में सुधार होते ही बिजली उत्पादन तथा ग्रामीण क्षेत्रों की रात की आपूर्ति में भी राहत मिलने की उम्मीद है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ