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स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर के स्कूलों में छात्रों को स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक

नई दिल्ली – स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत देशभर के स्कूलों में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) ने स्वच्छता व स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य फोकस हाथ स्वच्छता, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर रहा, ताकि विद्यार्थियों को स्वच्छ जीवनशैली की आदत डाली जा सके।

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शिक्षकों ने खुद संभाली कमान

इस पखवाड़े के दौरान शिक्षकों ने न सिर्फ बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया, बल्कि स्वयं भी आगे आकर स्कूलों के शौचालयों, कक्षाओं और किचन (मिड-डे मील किचन) की सफाई की। शिक्षकों ने पानी की आपूर्ति व्यवस्था की भी जांच की और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाकर स्कूल परिसर को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर शिक्षण स्थल बनाने में योगदान दिया।

बच्चों ने सीखा हाथ धोने का सही तरीका

अभियान के तहत स्कूलों में छात्रों को हाथ धोने के सही तरीके (20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना) सिखाए गए। विशेष सत्रों में बताया गया कि हाथों की सफाई बीमारियों से बचाव का सबसे सरल और कारगर उपाय है। इसके अलावा, पानी की बर्बादी रोकने और वर्षा जल को संरक्षित करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

स्कूल प्रबंधन समितियों ने निभाई अहम भूमिका

एसएमसी सदस्यों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था की समीक्षा की और पानी व सैनिटेशन सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। कई स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठकें आयोजित कर घरों में भी स्वच्छता अपनाने का संकल्प दिलाया गया।

'स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ देश' का संदेश

शिक्षा मंत्रालय ने इस पहल को 'स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ देश' की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि स्कूलों में बिछाई गई स्वच्छता की नींव ही आने वाली पीढ़ी को बीमारियों से बचाएगी। इस अभियान के तहत कई राज्यों के स्कूलों में नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता और स्वच्छता रैली जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

निष्कर्ष:-
स्वच्छता पखवाड़ा 2026 ने एक बार फिर साबित किया कि अगर शिक्षक, छात्र, अभिभावक और प्रबंधन सभी मिलकर प्रयास करें तो स्कूलों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना मुश्किल नहीं है। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पूरे समाज में व्यापक रूप से अपनाने की प्रेरणा देना है।

 

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