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अकबरपुर: गौहन्ना में धारा-24 के तहत रोवर तकनीक से हुआ गाटा संख्या 663 का सीमांकन, जानें क्यों खास है GNSS सिस्टम

तहसीलदार अकबरपुर ने ग्राम गौहन्ना में रोवर (GNSS) तकनीक से गाटा सं 663 का प्राथमिक सीमांकन कराया

आधुनिक तकनीक से पैमाइश में सटीकता और जमीन विवादों के त्वरित निस्तारण को मिलेगी रफ्तार


अकबरपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम गौहन्ना में वर्षों से लंबित चले आ रहे भूमि सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और आधुनिक कदम उठाया है। नवागत तहसीलदार अकबरपुर दिव्या भारती वर्मा ने ऐसा ही कदम उठाया है। के पर्यवेक्षण में राजस्व टीम द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 के अंतर्गत लंबित प्रकरण में गाटा संख्या-663 का आधुनिक रोवर (GNSS - ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) तकनीक के माध्यम से प्राथमिक सीमांकन संपन्न कराया गया। इस उच्च-स्तरीय डिजिटल तकनीक के प्रयोग से न केवल पैमाइश में शत-प्रतिशत सटीकता और पारदर्शिता आई है, बल्कि लंबे समय से अटके राजस्व विवादों के त्वरित व सर्वमान्य निस्तारण को भी नई गति मिली है।

पारंपरिक पैमाइश बनाम रोवर (GNSS) तकनीक

राजस्व विभाग में लंबे समय से जरीब और फीते के जरिए पैमाइश की पारंपरिक प्रणाली चली आ रही है। इस पुरानी व्यवस्था में अकसर मानवीय त्रुटियों, मेढ़ों के गायब होने या पक्षपात के आरोप लगते रहते हैं, जिससे विवाद खत्म होने के बजाय और बढ़ जाता है। इसके विपरीत, रोवर (GNSS) तकनीक पूरी तरह से उपग्रह (सैटलाइट) आधारित जीपीएस लोकेशन पर काम करती है।
  •  सेंटीमीटर स्तर की सटीकता: यह तकनीक उपग्रहों से मिले सिग्नलों के आधार पर भूखंड के सटीक अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) की गणना करती है। इससे खेत के हर कोने और सीमा की सटीक स्थिति दर्ज हो जाती है।
  • पारदर्शिता और निष्पक्षता: डिजिटल डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होता है, जिससे नाप-जोख में किसी भी तरह के मानवीय हेरफेर या पक्षपात की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
  • समय की भारी बचत: जहां पारंपरिक नाप-जोख में पूरा दिन लग जाता था और कई बार टीम को बार-बार मौके पर जाना पड़ता था, वहीं रोवर तकनीक से कुछ ही समय में संपूर्ण भूखंड का सटीक नक्शा और सीमाएं तय हो जाती हैं।

धारा-24 के मामलों के निस्तारण में क्रांतिकारी बदलाव

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 मुख्य रूप से काश्तकारों की जमीनों के सीमांकन और मेढ़बंदी के विवादों से संबंधित है। ग्रामीण क्षेत्रों में अदालती मुकदमों, पुलिस की व्यस्तता और आपसी वैमनस्य का सबसे बड़ा कारण जमीनों का यही सीमा विवाद होता है।
अकबरपुर एसडीएम दिव्या भारती वर्मा ने बताया है की ग्राम गौहन्ना के गाटा संख्या-663 में रोवर मशीन के सफल प्रयोग ने यह साबित कर दिया है।  उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और उपग्रह आधारित पैमाइश से विवादों को बिना किसी असंतोष के हल किया जा सकता है। जब सीमा का निर्धारण उपग्रह के डिजिटल डेटा के आधार पर होता है, तो दोनों पक्षों के पास आपत्ति जताने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बचता, जिससे मुकदमेबाजी पर तुरंत विराम लग जाता है।

जमीनी स्तर पर बदलाव और फायदे

विवादों का स्थाई समाधान: सटीक पैमाइश होने से काश्तकारों के बीच मेढ़ काटने या एक-दूसरे की जमीन दबाने की शिकायतों का हमेशा के लिए खात्मा होता है।
डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा: इस तकनीक से प्राप्त डेटा को राजस्व विभाग के डिजिटल पोर्टल और नक्शों से जोड़ा जा सकता है। भविष्य में यदि दोबारा कभी सीमा को लेकर संशय होता है, तो सैटेलाइट डेटा के जरिए सीमाओं को तुरंत चिन्हित किया जा सकेगा।
प्रशासनिक कार्यकुशलता: राजस्व अधिकारियों और क्षेत्र के लेखपालों को बार-बार एक ही जमीन की पैमाइश करने और अदालती जवाबदेही से राहत मिलेगी, जिससे वे अन्य विकासात्मक कार्यों में समय दे सकेंगे।

डिजिटल इंडिया और आधुनिकीकरण की ओर बढ़ते कदम

अकबरपुर तहसील प्रशासन द्वारा रोवर तकनीक का यह प्रयोग राज्य सरकार के भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण (DILRMP) और डिजिटल इंडिया मिशन के संकल्प को दर्शाता है। ग्रामीण इलाकों में भू-स्वामियों को उनकी संपत्ति का निर्विवाद और पारदर्शी हक दिलाना ही इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य है।
गौहन्ना गांव में हुआ गाटा सं.-663 का यह प्राथमिक सीमांकन अन्य लंबित मामलों के निस्तारण के लिए एक नजीर बनेगा। आने वाले समय में जैसे-जैसे रोवर (GNSS) तकनीक का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ घटेगा और गांवों में भूमि संबंधी विवादों में अभूतपूर्व कमी आएगी।

सोर्स - सोशल मीडिया/ट्विटर (DMAMBEDKARNAGAR)





Posted By - K D VISHWAKARMA 
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